महाराष्ट्र में BJP के प्रयोग से बिहार में नीतीश चौकन्ना, विधानसभा चुनाव से पहले हाई अलर्ट पर JDU.
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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 नतीजे के बाद भाजपा के ‘महा प्रयोग’ को लेकर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जदयू आशंकित बताई जा रही है. राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित जदयू ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को चुनाव के लिए हाई अलर्ट मोड पर रहने के संकेत दिए हैं.
महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव नतीजे के बाद बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना के एकनाथ शिंदे से मुख्यमंत्री का पद हासिल कर लिया है. भाजपा के इस ‘महा-प्रयोग’ ने एनडीए शासित राज्य बिहार पर भी असर डाला है. इसको लेकर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जदयू हाई अलर्ट पर है.
क्या बिहार में महाराष्ट्र वाला सियासी प्रयोग दोहरा सकती है भाजपा?
भाजपा आलाकमान की ओर से जदयू प्रमुख और सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही अगले साल 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के आश्वासन के बावजूद जदयू के सामने यह सवाल है कि क्या भाजपा बिहार की 243 सीटों वाली विधानसभा में 122 के बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचने पर “महाराष्ट्र प्रयोग” को दोहरा सकती है. हालांकि, जदयू का कोई भी नेता ऑन रिकॉर्ड इस मुद्दे पर बोलने के लिए राजी नहीं हुआ, लेकिन दबी जुबान में हर कोई इस तरह की सियासी नौबत के आने की आशंका से चिंतित दिख रहे हैं.
शिंदे ने दिया था बिहार के “गठबंधन मॉडल” को अपनाने का प्रस्ताव
रिपोर्ट के मुताबिक, सत्तारूढ़ जदयू के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि भाजपा ने बिहार के “गठबंधन मॉडल” को अपनाने के एकनाथ शिंदे के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जहां नीतीश कुमार अपनी पार्टी के भाजपा से कम सीटें जीतने के बावजूद सीएम बने रहेंगे. महाराष्ट्र में, शिंदे ने एनडीए या महायुति के चुनाव अभियान का बतौर मुख्यमंत्री नेतृत्व किया था और सत्ता में वापसी की उम्मीद को जमीन पर उतारा था. जबकि, 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में, जदयू ने सिर्फ़ 43 सीटें जीतीं, जो बीजेपी की 74 सीटों से 31 कम थीं, फिर भी नीतीश कुमार को सीएम पद की पेशकश की गई.
महाराष्ट्र के घटनाक्रम के बाद जदयू में नीतीश के भविष्य पर भी बहस
हालांकि, महाराष्ट्र के सियासी घटनाक्रम के बाद जदयू में नीतीश कुमार के भविष्य पर भी बहस शुरू हो रही है. जदयू के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि नीतीश कुमार “सत्ता के भूखे” नहीं हैं और उन्होंने 2020 में अपनी पार्टी के खराब प्रदर्शन के कारण सीएम बनने से इनकार कर दिया था. जदयू नेता ने कहा, “2020 में चुनाव के नतीजों के बाद, जदयू की जीती सीटों का हवाला देते हुए नीतीश कुमार ने सीएम के रूप में बने रहने से इनकार कर दिया, लेकिन भाजपा नेताओं राजनाथ सिंह, जे पी नड्डा और भूपेंद्र यादव ने उन पर जिम्मेदारी स्वीकार करने का दबाव बनाया था.”
बिहार का मामला महाराष्ट्र से अलग, एनडीए को मजबूत कर रहा जदयू
जदयू के एक अन्य पदाधिकारी ने कहा कि हालांकि महाराष्ट्र की घटनाओं के बाद पार्टी “डगमगाई” महसूस कर रही थी, लेकिन बिहार एक अलग मामला है. उन्होंने कहा, “एकनाथ शिंदे के पास विकल्प नहीं थे क्योंकि शिवसेना के दोनों गुट हिंदुत्व का पालन करते हैं और उनका सामाजिक आधार जदयू की तुलना में कमज़ोर है.” लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे के बाद साबित हुआ कि जदयू का 16.5 प्रतिशत समर्थन आधार एनडीए को मजबूत करता है, जिसने बिहार में 40 में से 30 सीटें जीती हैं.
बिहार में अगर नीतीश कुमार विपक्षी गठबंधन में शामिल हुए तो क्या होगा?
जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, “आप नीतीश कुमार से प्यार कर सकते हैं या उनसे नफरत कर सकते हैं, लेकिन आप उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते.” उन्होंने कहा कि एनडीए और विपक्षी इंडिया गठबंधन दोनों ही नीतीश कुमार की राजनीतिक ताकत को पहचानते हैं. वहीं, राजनीतिक विश्लेषक एनके चौधरी ने कहा कि विश्वसनीय विकल्प की कमी के कारण भाजपा बिहार में नीतीश कुमार की जगह नहीं ले सकती. उन्होंने आगे पूछा, “क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि अगर नीतीश कुमार विपक्षी गठबंधन में शामिल हो गए तो क्या होगा?”
नीतीश कुमार और भाजपा का गठबंधन महज सुविधाओं के लिए विवाह जैसा
एनके चौधरी ने कहा, “महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे शक्तिहीन थे, लेकिन बिहार में हर कोई नीतीश कुमार को गले लगाएगा.” एक अन्य राजनीतिक विश्लेषक डीएम दिवाकर ने कहा कि भाजपा विभिन्न रणनीतियों के माध्यम से नीतीश कुमार को कमजोर करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार और भाजपा एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते. उनका गठबंधन महज सुविधाओं के लिए विवाह जैसा है. इसको लेकर किसी भी तरह के सियासी कयास लगाए जा सकते हैं.”
असम सरकार के बीफ पर प्रतिबंध मामले में जदयू का भाजपा से अलग रुख
इस बीच, जदयू ने असम सरकार के बीफ की खपत पर प्रतिबंध पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इस मामले में खुद को भाजपा से अलग दिखाया है. जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, “ऐसे फैसले समाज में तनाव बढ़ाते हैं.” उन्होंने कहा कि देश का संविधान लोगों को अपना भोजन चुनने का अधिकार देता है और इन अधिकारों की रक्षा करना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है. जबकि भाजपा नेताओं का इस मुद्दे पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व शर्मा को पूरा समर्थन है.
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