वक्फ विधेयक लोकसभा में किन प्रावधानों के साथ पारित किया गया? महत्वपूर्ण बिंदु पढ़ें.
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वक्फ संशोधन विधेयक मध्य रात्रि के आसपास लोकसभा में पारित हो गया।
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कल (बुधवार) संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया। इसके बाद कल दोपहर 12 बजे से मध्य रात्रि तक विधेयक पर चर्चा हुई। इसके बाद आधी रात को लोकसभा में मतदान के बाद वक्फ संशोधन विधेयक पारित कर दिया गया। इस बार इस विधेयक के पक्ष में 288 वोट पड़े। अतः इसके विरोध में 232 वोट पड़े।
इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ताधारी दलों के सांसदों ने विधेयक का समर्थन किया, जबकि विपक्षी दलों के सांसदों ने इसका कड़ा विरोध किया। इस समय हॉल में बहुत अफरा-तफरी मची हुई थी। इस बीच, एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए संसद भवन में विधेयक को फाड़ दिया, जिस पर सत्ताधारी दलों ने आपत्ति जताई।
वक्फ विधेयक क्या है?
वक्फ संशोधन विधेयक, 2024, वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन करने के लिए पेश किया गया विधेयक है। यह विधेयक केंद्र सरकार द्वारा वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन, पारदर्शिता और दुरुपयोग की रोकथाम के नियमों को कड़ा करने के लिए लागू किया जा रहा है।
इस विधेयक के बाद क्या परिवर्तन होंगे?
इस विधेयक में वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों और महिलाओं को शामिल करना, जिला मजिस्ट्रेट को संपत्तियों के सर्वेक्षण का अधिकार देना और वक्फ न्यायाधिकरण के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देना जैसे प्रावधान शामिल हैं। इस विधेयक के पारित होने के बाद किसी भी संपत्ति को जबरन वक्फ संपत्ति घोषित नहीं किया जा सकेगा। जवाहरलाल नेहरू सरकार ने 1954 में वक्फ अधिनियम पारित किया। साथ ही, 1995 में वक्फ अधिनियम में संशोधन किए गए। इसके बाद राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वक्फ बोर्ड स्थापित करने की अनुमति दी गई। यह कानून वक्फ संपत्ति पर दावों और उसके प्रबंधन के संबंध में प्रावधान करता है।
विधेयक के कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान
1) वक्फ परिषद में चार गैर-मुस्लिम सदस्य हो सकते हैं। इसमें दो महिलाओं का होना अनिवार्य होगा।
2) वक्फ बोर्ड यह निगरानी करेगा कि संपत्ति का प्रबंधन ‘मुतवल्लियों’ यानी प्रबंधकों द्वारा उचित ढंग से किया जा रहा है या नहीं।
3) बोर्ड को वक्फ की परिसंपत्तियों का सीधे प्रबंधन करने का अधिकार नहीं होगा।
4) वक्फ बोर्ड समावेशी होंगे। इसमें न केवल सुन्नी बल्कि अन्य मुस्लिम संप्रदायों के सदस्य भी शामिल होंगे।
5) मस्जिदों या अन्य धार्मिक स्थलों के प्रबंधन में वक्फ बोर्ड के प्रावधानों का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
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