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    April 4, 2025

    MIT में प्रवेश पाने का दृढ़ संकल्प! असफलता का सामना करते हुए पढ़िए उनकी कड़ी मेहनत की यात्रा।

    1 min read
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    अक्सर कहा जाता है कि अगर आपमें किसी चीज को लेकर जुनून है तो कोई भी असफलता आपको सफलता हासिल करने से नहीं रोक सकती।

    अक्सर कहा जाता है कि अगर आपमें किसी चीज को लेकर जुनून है तो कोई भी असफलता आपको सफलता हासिल करने से नहीं रोक सकती। ऋत्विक हलधर की प्रेरक कहानी यह साबित करती है। प्रारंभ में, वह एक अच्छे छात्र नहीं थे। उन्होंने अपनी शिक्षा एक बंगाली मीडियम स्कूल से शुरू की। उन्हें पढ़ाई करना बिल्कुल भी पसंद नहीं था. पढ़ाई एक बोझ थी, क्योंकि उन्हें उचित मार्गदर्शन नहीं मिला और वे केवल पाठ याद करने पर निर्भर थे।

    लेकिन, जब वह 10वीं कक्षा में थे, तो चीजें बदल गईं। रितिक ने ठगी बंद करने का फैसला किया और इसके बजाय अवधारणा को समझने पर ध्यान केंद्रित किया। इस छोटे से बदलाव से पढ़ाई के प्रति उनके दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव आया। उसे सीखने में आनंद आने लगा और वह निरंतर प्रगति करता रहा।

    पहला बड़ा प्रदर्शन
    रितिक की कड़ी मेहनत तब सफल हुई जब उन्होंने हाई स्कूल परीक्षा में 93.4% अंक हासिल किए। लेकिन, संघर्षों के बिना उनका सफर अधूरा था। हाई स्कूल के बाद, वह जेईई, जेईई एडवांस्ड, एनईईटी और केवीपीवाई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हुए, लेकिन कई बार असफल रहे। इन कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपना प्रयास जारी रखा।

    उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ तब आया जब उन्हें बेलूर के प्रतिष्ठित रामकृष्ण मिशन स्कूल (आरकेएम) में पढ़ने का अवसर मिला। वहां के वातावरण ने स्वाध्याय को प्रोत्साहित किया। वहां उत्कृष्ट पुस्तकालय सुविधाएं उपलब्ध थीं, जिससे उन्हें विषयों, विशेषकर रसायन विज्ञान की समझ बढ़ाने में मदद मिली। हालाँकि वह एक बार फिर केवीपीवाई एसबी परीक्षा में असफल रहे, लेकिन उन्होंने एससी श्रेणी में 10वीं रैंक हासिल की और आईआईएसईआर पुणे में प्रवेश लिया।

    एमआईटी पहुंचे…
    IISER पुणे में ऋतिक की शैक्षणिक यात्रा नई ऊंचाइयों पर पहुंची। उन्होंने आलोचनात्मक सोच, अनुसंधान और अवधारणा निर्माण में मजबूत कौशल विकसित किया। उन्होंने खुद को बेहतर बनाने के लिए बेहद मेहनत की। उनके समर्पण और लगातार प्रयासों ने अंततः उनके लिए विश्व प्रसिद्ध मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के दरवाजे खोल दिए। रितिक की कहानी हमें सिखाती है कि असफलता अंत नहीं है। दृढ़ संकल्प, धैर्य और आत्मविश्वास तथा भरपूर अध्ययन से हम किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं और अपने सपनों को हासिल कर सकते हैं।

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