रैपिडो ने कर्नाटक में कदम रखा; उच्च न्यायालय ने बाइक टैक्सियों पर प्रतिबंध लगाया।
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कर्नाटक में बाइक टैक्सियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में बाइक टैक्सियों को मंजूरी दे दी है। प्रदेश में अब कम से कम एक लाख की आबादी वाले शहरों में बाइक टैक्सी चलेंगी। कर्नाटक में बाइक टैक्सियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक फैसला सुनाया जिसके अनुसार कर्नाटक में बाइक टैक्सी ऐप और सेवाएं बंद कर दी जाएंगी। इससे राज्य में रैपिडो, ओला और उबर जैसी बाइक टैक्सी सेवाओं को बड़ा झटका लगा है। न्यायमूर्ति बी.एम. श्याम प्रसाद द्वारा दिए गए इस आदेश के अनुसार, इन सभी बाइक टैक्सी सेवाओं को छह सप्ताह के भीतर बंद करना होगा। ये सेवाएं तब तक बंद रहेंगी जब तक कर्नाटक सरकार मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत ठोस नियम नहीं बना लेती।
अदालत ने कौन सी याचिकाएं खारिज कर दीं?
कंपनियों ने बाइक टैक्सियों को कानूनी मान्यता देने और दोपहिया वाहनों को परिवहन वाहन के रूप में पंजीकृत करने की अनुमति देने की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की थीं, लेकिन अदालत ने उन्हें खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि वह गैर-परिवहन वाहनों को परिवहन वाहन के रूप में पंजीकृत करने का आदेश नहीं दे सकती। सरकार को बाइक टैक्सियों के लिए नियम और दिशानिर्देश तैयार करने के लिए भी तीन महीने का समय दिया गया है।
कर्नाटक के परिवहन मंत्री ने क्या कहा?
कर्नाटक के परिवहन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा, “हम इस मामले का विस्तार से अध्ययन करेंगे। अदालत ने हमें छह सप्ताह का समय दिया है। उसने हमें उचित दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए भी कहा है। हम उसके अनुसार काम करेंगे।”
रैपिडो प्रवक्ता ने क्या कहा?
“कर्नाटक उच्च न्यायालय ने छह सप्ताह की समयसीमा दी है और हमें बाइक सेवा बंद करने का निर्देश दिया है। इस अवधि के दौरान राज्य परिवहन विभाग को हमारे खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। रैपिडो अब लाखों बाइक सवारों के बारे में चिंतित है। आदेश की एक प्रति प्राप्त करने के बाद हम सभी उचित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करेंगे।”
वकील अरुण कुमार ने अदालत को बताया कि बाइक टैक्सी सेवा अप्रैल 2024 में शुरू हो गई है, लेकिन साथ ही याचिकाकर्ताओं को अब निर्देशों का पालन करना चाहिए और बाइक चलाना बंद कर देना चाहिए। अदालत ने भी यही कहा।
यह निर्णय क्यों लिया गया?
यह निर्णय बेंगलुरू में ऑटो-रिक्शा और कैब चालकों के लगातार विरोध के बाद लिया गया है। उनका कहना है कि बाइक टैक्सियां ज्यादातर सफेद नंबर प्लेट वाले (निजी उपयोग वाले) वाहनों का इस्तेमाल करती हैं, जो कानूनी नहीं है और इससे उनकी आजीविका प्रभावित होती है। कर्नाटक परिवहन विभाग ने 2021 में इलेक्ट्रिक बाइक टैक्सी योजना को वापस ले लिया था क्योंकि पाया गया था कि इसका दुरुपयोग किया जा रहा था। इस पृष्ठभूमि में, यह अदालती आदेश बाइक टैक्सी सेवाओं के लिए स्पष्ट नियमों की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है। इस प्रतिबंध से राज्य के पांच लाख से अधिक बाइक टैक्सी चालकों के रोजगार पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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