CM के कहने पर छोड़ दिया IAS का पद, ये शख्स हो सकता है नीतीश का सियासी वारिस!
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कहा जाता है कि मनीष वर्मा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ रहने के लिए सिविल सेवा में अपना बेहतर करियर कुछ साल पहले छोड़ दिया था.
इधर लंबे समय से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्वास्थ्य की चर्चाओं के बीच उनके सियासी वारिस के बारे में कयास लगते रहते हैं. आईएएस से नेता बने आरसीपी सिंह को कभी नीतीश कुमार का सियासी उत्तराधिकारी कहा जाता था लेकिन 2022 में वे जदयू से अलग हो गए. उसके बाद ललन सिंह और संजय झा के नाम चले लेकिन मंगलवार को एक ऐसे शख्स ने जनता दल (यूनाइटेड) में एंट्री ली है जिसके बाद पुराने नामों पर विराम लगता सा दिख रहा है. पटना में जेडीयू के भीतर गहमागहमी है और कयासों का नया दौर शुरू हो गया है. 9 जुलाई को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विश्वासपात्र माने जाने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी मनीष कुमार वर्मा जेडीयू में शामिल हो गए.
कौन हैं मनीष कुमार वर्मा
आईआईटी दिल्ली के छात्र रहे मनीष वर्मा अपने दूसरे प्रयास में सन 2000 में आईएएस अफसर बने. उनको ओडिशा कैडर मिला था. वहां 12 साल तक सर्विस करने के बाद उन्होंने पिता के खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए 2012 में अपने गृह राज्य में प्रतिनियुक्ति की मांग की थी. बिहार पहुंचने के बाद वो पटना और पूर्णिया के डीएम बने. राज्य की बिजली कंपनियों का नेतृत्व किया और 2021 में उनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त हो गई लेकिन कहा जाता है कि नीतीश कुमार के साथ रहने के लिए उन्होंने सिविल सेवा से वीआरएस ले लिया. उसके बाद उनको बिहार आपदा प्रबंधन अथॉरिटी का सदस्य बनाया गया. 2022 में उनको सीएम का एडवाइजर (इंफ्रास्ट्रक्चर) बनाया गया. जेडीयू में शामिल होने से पहले उन्होंने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया.
नालंदा से नाता
नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा से ताल्लुक रखते हैं और उनकी ही तरह कुर्मी जाति से हैं. हालांकि उनकी पारिवारिक जड़ें पड़ोसी गया क्षेत्र से संबंधित हैं लेकिन अब उनका बेस नालंदा के बिहारशरीफ में है. उनके पिता डॉ अशोक वर्मा बिहारशरीफ के फेमस डॉक्टर रहे हैं. उनकी शिक्षा-दीक्षा वहां के सरकारी स्कूल के बाद पटना में हुई. आईआईटी दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया. आईएएस बनने से पहले इंडियन ऑयल कारपोरेशन में भी काम किया.
पार्टी में रोल
वर्मा का पटना स्थित जदयू मुख्यालय में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में बड़े धूमधाम से स्वागत किया गया. इस दौरान झा ने कहा, ‘हमारी पार्टी बिहार से बाहर अपने आधार का विस्तार करने के बारे में गंभीरता से सोच रही है. हमें यकीन है कि वर्मा का समृद्ध प्रशासनिक अनुभव जदयू के लिए बहुत काम आएगा.”
हालांकि पार्टी ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वर्मा को जदयू के भीतर क्या जिम्मेदारी सौंपी जाएगी लेकिन कहा जा रहा है कि पार्टी के भीतर उनको भविष्य के नेता के रूप में देखा जा रहा है. वह जेडीयू संगठन की गतिविधियों में पिछले एक साल से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं. जेडीयू सूत्रों का कहना है कि उनको नेशनल जनरल सेक्रेट्री (संगठन) का पद दिया जा सकता है. आरसीपी सिंह के पास ये पद लंबे समय तक था.
इस अवसर पर वर्मा ने अपने संरक्षक की प्रशंसा करते हुए कहा कि बिहार की सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री ‘असाधारण व्यक्तित्व’, ‘सच्चे समाजवाद’ के प्रतीक और वादों को पूरा करने के लिए जाने जाते हैं, जो ‘राजनेताओं में दुर्लभ है’.
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