जनवरी में औद्योगिक उत्पादन दर 5 प्रतिशत से अधिक हो गयी।
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औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) द्वारा मापा गया कारखाना उत्पादन पिछले वर्ष जनवरी 2024 में 4.2 प्रतिशत बढ़ा।
नई दिल्ली: बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी), जिसे देश के विनिर्माण क्षेत्र के प्रदर्शन और उत्पादन वृद्धि का प्रतिबिंब माना जाता है, जनवरी में 5 प्रतिशत के स्तर को पार कर गया। इसे देश के औद्योगिक क्षेत्र की गतिशीलता का सूचक माना जाता है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में वृद्धि हुई है, जिसका मुख्य कारण विनिर्माण क्षेत्र का मजबूत प्रदर्शन है।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) द्वारा मापा गया कारखाना उत्पादन पिछले वर्ष जनवरी 2024 में 4.2 प्रतिशत बढ़ा। दिसंबर 2024 में इसमें 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 में विनिर्माण क्षेत्र का प्रदर्शन 5.5 प्रतिशत बढ़ा, जो पिछले वर्ष इसी महीने में दर्ज 3.6 प्रतिशत से अधिक है। विनिर्माण गतिविधियों में वृद्धि के कारण जनवरी 2025 में देश की ‘आईआईपी’ में वृद्धि हुई।
इससे पहले नवंबर 2024 में आईआईपी ग्रोथ 5 फीसदी दर्ज की गई थी। खनन और बिजली क्षेत्र का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। खनन उत्पादन की वृद्धि दर पिछले वर्ष की तुलना में 6 प्रतिशत से घटकर 4.4 प्रतिशत रह गयी है। जनवरी 2025 में बिजली उत्पादन की वृद्धि दर पिछले वर्ष के 5.6 प्रतिशत से धीमी होकर 2.4 प्रतिशत हो जाएगी। अप्रैल-जनवरी अवधि के दौरान आईआईपी में 4.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की 6 प्रतिशत वृद्धि से कम है।
उपभोग आधारित वर्गीकरण के अनुसार, पूंजीगत वस्तु क्षेत्र की वृद्धि जनवरी 2024 में बढ़कर 7.8 प्रतिशत हो गई, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 3.2 प्रतिशत थी। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु क्षेत्र में वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रही। जो जनवरी 2025 में 11.6 प्रतिशत थी। जनवरी 2025 में बुनियादी ढांचा/निर्माण सामान क्षेत्र में 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 5.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। जनवरी 2025 में प्राथमिक वस्तुओं का उत्पादन 5.5 प्रतिशत बढ़ा, जो पिछले वर्ष 2.9 प्रतिशत था।
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